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डूंगरपुर कचरे से लाखों रुपए कमा रहा यह देश

राजस्थान में छोटा सा शहर है डूंगरपुर, मगर नवाचार के मामले में यह बड़े-बड़े शहरों को भी पीछे छोड़ रहा है। डूंगरपुर कचरे से लाखों रुपए कमा रहा है। यह सब डूंगरपुर नगर परिषद के प्रयासों से संभव हो रहा है। इसके लिए राष्ट्रपति व राज्य सरकार समेत कई जगहों से पुरस्कार पा चुके डूंगरपुर नगर परिषद को अब 24 मई 2019 को नई दिल्ली में नीदरलैंड सरकार पुरस्कृत करेगी।

हर माह बेच रहे खाद
भंडारिया घाटा में कचरा पहुंचने के बाद इसमें जूठन आदि को वर्मी कम्पोस्ट में बदलकर उससे जैविक खाद बनाई जा रही है और अन्य कबाड़ को सीधा बेचा जा रहा है। हर माह कचरे से दो से तीन टन जैविक खाद तैयार हो रहा है। भंडारिया में तैयार हो रही जैविक खाद को आमजन घर के बाग-बगीचों और किसान खेतों के लिए खरीद रहे हैं। इस जैविक खाद की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है।

कई राज्यों की टीमें कर चुकी दौरा

डूंगरपुर नगर परिषद आयुक्त गणेश खराड़ी के अनुसार उनके यहां किए गए नवाचार को देशभर में सराहा गया है। राजस्थान के कई जिलों समेत मध्य प्रदेश के इंदौर की टीम भी डूंगरपुर का दौरा कर चुकी है। इसके अलावा जिला स्तर, राज्य स्तर पर डूंगरपुर नगर परिषद सम्मानित किया जा चुका है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हमें स्वच्छ सिटी के पुरस्कार से नवाजा है। अब नीदरलैंड सरकार पुरस्कृत करने जा रही है।

हर घर से गाय के लिए रोटी

डूंगरपुर नगर परिषद शहर को स्वच्छ रखने, कचरे से राजस्व जुटाने के साथ-साथ गोवंश संरक्षणक की दिशा में भी प्रयास कर रही है। इसके लिए सुबह-सुबह घरों से कचरा उठाने वाले वाहनों में गाय की रोटी के लिए बॉक्स लगाया हुआ है। प्रत्येक घर से गाय के लिए एक-एक रोटी एकत्रित की जाती है, जिन्हें भंडारिया स्थित गोशाला पहुंचाते हैं।

सभापति के प्रयासों का नतीजा

डूंगरपुर नगर परिषद के सभापति केके गुप्ता हैं। आयुक्त गणेश खराड़ी बताते हैं कि केके गुप्ता अकेले ऐसे सभापति हैं, जो नवाचारों में रुचि ले रहे हैं। उनकी मॉनिटरिंग और मार्गदर्शन का ही नतीजा है कि साफ-सफाई और कचरे से कमाई में डूंगरपुर नगर परिषद अन्य निकायों से अव्वल है।

तीन साल पहले बनी थी योजना

वन इंडिया से बातचीत में ( Dungarpur Nagar Parishad ) डूंगरपुर नगर परिषद आयुक्त गणेश खराड़ी ने बताया कि 2015-16 से पहले तक हमारे लिए रसोई घर का जूठन और शहर के सार्वजनिक जगहों पर मिलने वाला कचरा महज कचरा था, मगर अब राजस्व का बड़ा जरिया बन गया है। शहर का सारा कचरा एक साथ एकत्रित करके डंपिंग यार्ड में शहर से करीब छह किलोमीटर दूर गांव भंडारिया घाटा में एकत्रित किया जाता है। तीन साल पहले योजना बनाकर तय किया कि अब शहर में गीला कचरा और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्रित करेंगे। मतलब रसोई का जूठन और कचरा एक तरफ तथा प्लास्टिक, कबाड़ आदि दूसरी तरफ।

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