Wednesday , November 14 2018
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जाने किस कारण मंत्रालय ने एफिडेविट में न्यायालय से की विनती

केंद्र गवर्नमेंट ने सुप्रीम न्यायालय में एफिडेविट दाखिल कर विनती की है कि रिहायशी इलाके की दुकानों को सील करने से पहले 15 दिन की मोहलत दी जाए. इससे आम लोगों को कमेटी के सामने महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश करने में सहूलियत होगी. इससे पहले सुप्रीम न्यायालय ने 2 नवंबर के आदेश में बोला था कि 48 घंटे के कारण बताओ नोटस पर बेजा प्रयोगहोने वाली प्रॉपर्टी को सील कर दिया जाए.
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केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि मंत्रालय में इस बारे में सुप्रीम न्यायालय  में एफिडेविट दाखिल किया है. मंत्रालय का मानना है कि 48 घंटे की नोटिस आम दिल्लीवालों पर भारी पड़ेगी. बगैर कोई दूसरा बंदोवस्त हुए प्रापर्टी सील होने से लोगों को भारी कठिनाई होगी.

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मंत्रालय ने एफिडेविट में न्यायालय से विनती की है कि रिहायशी इलाके में दुकान चलाने या कोई दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वाले लोगों को 15 दिन का कारण बताओ नोटिस दिया जाना चाहिए.इसके पीछे मंत्रालय का तर्क है कि आम इंसान की अपनी निजी, सामाजिक और दूसरी कई बाध्यताओं के चलते कई बार संभव नहीं होता कि वह सभी दस्तावेज 48 घंटे में पेश कर सके.  मानवीय आधार 15 दिन का वक्त आम लोगों को दिया जाना चाहिए.

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जागरूकता अभियान चलाए डीडीए और एमसीडी

अदालत के आदेश के बाद मंत्रालय ने डीडीए और एमसीडी को आदेश दिया है कि न्यायालय के आदेश के बारे में लोगों को जानकारी देने की जागरूकता अभियान चलाया जाए. इसके लिये मीडिया में एडवरटाईजमेंट भी दिया जाए. इससे सीलिंग के दायरे में आने वाले लोगों को न्यायालय के आदेश की जानकारी मिलेगी  वह एहतियाती कदम उठा सकेंगे.
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