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25 वर्षों से माकपा को मिल रही बीजेपी से जोरदार टक्कर

नई दिल्ली: त्रिपुरा विधानसभा चुनाव-2018 के रण में सत्तारूढ़ मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा)  कांग्रेस पार्टी को तीसरे नंबर पर धकेलने की एक्सरसाइज़ में जुटी बीजेपी ने मैदान मारने के लिए अपनी अपनी कमर कस ली है पिछले 25 वर्षों से सत्ता संभाल रही माकपा को इस चुनाव में बीजेपी से जोरदार मुक़ाबला मिल रही है, जिसका अंदाजा प्रतापगढ़ विधानसभा एरिया से लगाया जा सकता है त्रिपुरा विधानसभा सीट संख्या-13 यानी प्रतापगढ़ निर्वाचन एरिया पश्चिमी त्रिपुरा लोकसभा निर्वाचन एरिया का भाग है, जो अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है एरिया में कुल मतदाताओं की संख्या 52,697 है, जिसमें से 26,719 पुरुष  25,978 महिलाएं शामिल हैं

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माकपा के सबसे सुरक्षित किला
पश्चिमी त्रिपुरा का प्रतापगढ़ विधानसभा एरिया माकपा के सबसे सुरक्षित किलों में से एक है दरअसल, पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल करने के बाद साल 1972 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के मधुसूदन दास ने यहां से जीत हासिल की थी, लेकिन 1977 के विधानसभा चुनाव में माकपा नेता अनिल गवर्नमेंट ने उन्हें हराकर यह सीट हासिल की थी साल 1977 में जीत के बाद लगातार सात  कुल आठ चुनाव जीत कर अनिल गवर्नमेंट ने राज्य की पॉलिटिक्स में अपनी धाक जमा ली शिक्षक से राजनेता बने अनिल गवर्नमेंट ने 1978 के बाद से वाम मोर्चे की सात सरकारों में से छह में बतौर मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं

अनिल गवर्नमेंट की धाक
अनिल गवर्नमेंट 1956 में भाकपा में शामिल हुए थे  1964 में माकपा की स्थापना के दौरान वह पार्टी के सदस्य बने 1972 में उन्हें कांग्रेस पार्टी शासन काल में कारागार जाना पड़ा था 1975 में आपातकाल के दौरान वह अगरतला, वेल्लोर (तमिलनाडु)  नौगांव (असम) की जेलों में रहे इसके अतिरिक्त उन्होंने 1971 में नौ महीने के लंबे बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान त्रिपुरा में आश्रित लाखों शरणार्थियों को राहत  आश्रय प्रदान करने में एक अहम किरदार निभाई थी

कलकत्ता विश्वविद्यालय से 1963 में बांग्ला भाषा में परास्नातक की इम्तिहान करने वाले अनिल गवर्नमेंट माकपा के महान नेताओं में से एक थे साथ ही निधन से पहले वह त्रिपुरा योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भी रहे अनिल गवर्नमेंटलेखक, कवि  बुद्धिजीवी के रूप में विभिन्न क्षमताओं वाले एक आदमी थे

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अनिल गवर्नमेंट के बाद रामू दास ने हासिल की जीत
10 फरवरी, 2015 को गवर्नमेंट के निधन के बाद प्रतापगढ़ विधानसभा सीट खाली हो गई, जिस पर हुए उपचुनाव में माकपा के ही रामू दास ने अपनी बीजेपी प्रतिद्वंद्वी मौसमी दास को 17 हजार से ज्यादा मतों से हराया बीजेपी ने कांग्रेस पार्टी उम्मीदवार रंजीत कुमार दास को तीसरे नंबर पर धकेल दिया था उपचुनाव में बीजेपी को 10,229 मत प्राप्त हुए थे तो वहीं कांग्रेस पार्टी को 5,187 मत

मापका ने जताया रामू दास पर भरोसा
उपचुनाव में मिली जीत के बाद माकपा ने प्रतापगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के लिए फिर से रामू दास पर भरोसा जताया है रामू पर अनिल गवर्नमेंट के करिश्मे  उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का दबाव होगा उपचुनावों के नतीजों ने बीजेपी को संजीवनी देने के कार्य किया  एरिया में आधार के विस्तार में मजबूती बीजेपी ने इस बार यहां से रेवती मोहन दास को टिकट दिया है दास बीजेपी राज्य इकाई में आमंत्रित सदस्य हैं

कांग्रेस ने अर्जुन दास को दिया टिकट
वहीं कांग्रेस पार्टी ने यहां से अर्जुन दास को अपना उम्मीदवार घोषित किया है 1972 में मधुसूदन को मिली जीत कांग्रेस पार्टी के लिए यहां पहली  अंतिम जीत रही है मधु के बाद से कोई भी कांग्रेसी नेता इस सीट को जीतने में नाकाम रहा है दास पर उपचुनावों में पार्टी को मिली करारी पराजय से उबारने की जिम्मेदारी है इसके अतिरिक्ततृणमूल कांग्रेस पार्टी के मिथुन दास  आम्रा बंगाली के उम्मीदवार वीरेंद्र दास चुनाव मैदान में अपनी भाग्य आजमा रहे हैं

मतदान 18 फरवरी को होगा
अनिल गवर्नमेंट के निधन के बाद माकपा की सबसे सुरक्षित सीटों में से एक प्रतापगढ़ पर मुकाबला दिलचस्प रहने वाला है, क्योंकि बीजेपी की दावेदारी से यहां जनता के बीच एक अलग सा उत्साह है ‘चलो पालटाई’ का बीजेपी का नारा यहां कितना सटीक बैठता है यहल देखनी वाली बात रहेगी 60 सदस्यीय त्रिपुरा विधानसभा के लिए मतदान 18 फरवरी को होगा  वोटों की गिनती तीन मार्च को मेघालय  नगालैंड के साथ ही होगी

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