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आरूषि हत्याकांड: पूर्व सीबीआई जज हाईकोर्ट, केन्द्रीय जांच ब्यूरो को नोटिस जारी

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने आरूषि-हेमराज हत्याकांड में फैसला सुनाने वाले विशेष अदालत के न्यायाधीश की उस याचिका पर शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार और केन्द्रीय जांच ब्यूरो को नोटिस जारी किए जिसमें उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय में अपनी आलोचनाओं को रिकॉर्ड से हटाने का अनुरोध किया है. विशेष न्यायाधीश श्याम लाल (अब सेवानिवृत्त) ने ही इस हत्याकांड में नवंबर, 2013 में राजेश तलवार और उनकी पत्नी नूपुर तलवार को उम्र कैद की सजा सुनाई थीं. इस पूर्व न्यायाधीश ने आरोप लगाया है कि उच्च न्यायालय ने 12 अक्टूबर, 2017 को तलवार दंपति को बरी करते हुये अपने फैसले में ‘‘अपमानजनक और अनावश्यक टिप्पणियां’’ की हैं. उन्होंने इन टिप्पणियों को रिकार्ड से हटाने का अनुरोध किया है.

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न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ ने इस याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार, केन्द्रीय जांच ब्यूरो और इलाहाबाद उच्च न्यायालय को नोटिस जारी किए हैं. इन सभी से चार सप्ताह के भीतर नोटिस का जवाब मांगा गया है. सेवानिवृत्त न्यायाधीश की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस आर सिंह ने कहा कि उनके खिलाफ की गई टिप्पणियां अंतत: उनके निष्पक्ष और पारदर्शी न्यायाधीश होने की प्रतिष्ठा को ही प्रभावित करेंगी, इसलिए इन्हें रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए. सिंह ने कहा कि फैसले में की गई ये टिप्पणियां न तो आवश्यक थीं और न ही शीर्ष अदालत द्वारा प्रतिपादित व्यवस्था के अनुरूप थीं.

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श्याम लाल ने अपनी याचिका में कहा है कि तलवार दंपति को बरी करने के उच्च न्यायालय के फैसले से उन्हें शिकायत नहीं है लेकिन उनकी शिकायत खंडपीठ के एक सदस्य के अलग परंतु सहमति वाले फैसले में की गई टिप्पणियों को लेकर है. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने अलग से लेकिन सहमति वाले फैसले में कहा था कि निचली अदालत के न्यायाधीश ने अपने ही तरीके से चीजों के बारे में पहले से ही निर्णय कर लिया और अपना ही निष्कर्ष निकाल लिया.

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उच्च न्यायालय ने फैसले में यह भी कहा था कि निचली अदालत के न्यायाधीश ने इस मामले में साक्ष्य और परिस्थितयों को पहले से ही स्वीकार मान लिया और फिर इसे गणित के सवाल की तरह से हल करने का प्रयास किया. सीबीआई के न्यायाधीश के पद पर गाजियाबाद की अदालत में पदासीन श्याम लाल ने 25 नवंबर, 2013 को तलवार दंपति को अपनी पुत्री आरूषि और नौकर हेमराज की हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सजा सुनाई थी.

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लाल ने अपनी याचिका में कहा है कि 30 नवंबर, 2013 को सेवानिवृत्त होने तक का 28 साल का उनका सेवाकाल बेदाग रहा है और उन्होंने निठारी कांड के सुरेन्द्र कोली और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्य सचिव नीरा यादव के भ्रष्टाचार जैसे अनेक महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की थी.

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